Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
तया जगदिदं कृत्स्नमवन्त्या मिथिलेश्वर: । तत्र तत्र श्रुतो मोक्षे कथ्यमानस्त्रिदण्डिभि:
सम्पूर्ण जगत में विचरती हुई सुलभा ने जहाँ-तहाँ त्रिदण्डी संन्यासियों के मुख से मोक्षतत्त्व का उपदेश सुनते हुए मिथिला के स्वामी राजा जनक की प्रशंसा सुनी।
भीष्म उवाच