Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
यस्माच्चैतन्मया प्राप्तं ज्ञानं वैशेषिकं पुरा । यस्य नान्य: प्रवक्तास्ति मोक्ष तमपि मे शूणु
जिनसे मैंने पूर्वकाल में मोक्ष-विषयक यह विशिष्ट ज्ञान प्राप्त किया था, जिसका उनके सिवा दूसरा कोई प्रवक्ता नहीं है—उस ज्ञान और उस ज्ञानदाता गुरु का परिचय भी आप मुझसे सुनें।
जनक उवाच