Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
अव्यक्तं यदि वा व्यक्त द्यीमथ चतुष्टयीम् । प्रकृति सर्वभूतानां पश्यन्त्यध्यात्मचिन्तका:
“कारण अव्यक्त हो या व्यक्त, दोनों हों अथवा चतुष्टयी हो—अध्यात्म का चिन्तन करने वाले विद्वान् समस्त भूतों का उपादान-कारण प्रकृति को ही मानते हैं।”
भीष्य उवाच