शुकस्य मिथिलागमनम् (Śukasya Mithilāgamanam) — Śuka’s Journey to Mithilā and the Courtly Test
ततः कालाग्निमासाद्य तदम्भो याति संक्षयम् | विनष्टे5म्भसि राजेन्द्र जाज्वलत्यनलो महान्
तदनन्तर कालाग्नि के संसर्ग से वह सारा जल क्षीण हो जाता है। राजेन्द्र! जल के नष्ट हो जाने पर महान् अनल अत्यन्त भयानक रूप धारण करके सब ओर प्रचण्ड वेग से प्रज्वलित होने लगता है।
याज़्वल्क्य उवाच