शुकस्य मिथिलागमनम् (Śukasya Mithilāgamanam) — Śuka’s Journey to Mithilā and the Courtly Test
मनो ग्रसति भूतात्मा सो5हंकार: प्रजापति: । अहंकारं महानात्मा भूतभव्यभविष्यवित्
याज्ञवल्क्य बोले— भूतात्मा, जो प्रजापति-स्वरूप अहंकार है, मन को अपने में ग्रस लेता है। और भूत-भव्य-भविष्य का ज्ञाता, बुद्धि-स्वरूप महान् तत्त्व, उस अहंकार को भी निगल लेता है।
याज़्वल्क्य उवाच