Śukasya Janma-yoga-phalaṁ — Vyāsasya Tapasā Putrārthaḥ (Śānti-parva 310)
एते विशेषा राजेन्द्र महाभूतेषु पजचसु । बुद्धीन्द्रियाण्ययथैतानि सविशेषाणि मैथिल,राजेन्द्र! उनमें पाँच कर्मेन्द्रियों और शब्द आदि पाँच विषयोंकी “विशेष” संज्ञा है और ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ 'सविशेष” कहलाती हैं। मिथिलानरेश! ये “विशेष” और “सविशेष” तत्त्व पञ्चमहाभूतोंमें ही स्थित हैं
ete viśeṣā rājendra mahābhūteṣu pañcasu | buddhīndriyāṇy athaitāni saviśeṣāṇi maithila ||
राजेन्द्र! ये पाँच महाभूतों में स्थित ‘विशेष’ कहलाते हैं। और हे मिथिला-नरेश! ये ही ज्ञानेन्द्रियाँ ‘सविशेष’ कही जाती हैं। ‘विशेष’ और ‘सविशेष’—ये भेद पंचमहाभूतों में ही प्रतिष्ठित हैं।
याज़्ञवल्क्य उवाच