Jarā-Mṛtyu-anatikrama: Janaka–Pañcaśikha-saṃvāda
Aging and Death Cannot Be Overstepped
अव्यक्तं व्यक्तधर्माणं सगुणं निर्गुणं तथा । निर्गुणं प्रथमं दृष्टवा तादृगू भवति मैथिल
मिथिलानरेश! अव्यक्त प्रकृति, व्यक्त-धर्म वाले महत्तत्त्व आदि, सगुण जडवर्ग, निर्गुण आत्मा तथा सबके आदिभूत निर्गुण परमात्मा का साक्षात्कार करके मनुष्य स्वयं भी वैसा ही हो जाता है।
वसिष्ठ उवाच