सांख्ययोगभेदः तथा योगबलोपदेशः
Sāṃkhya–Yoga Distinction and Instruction on Yogic Strength
भीष्म उवाच शृणु राजन्नवहित: सर्वमेतद् यथातथम् । यथामति यथा चैतच्छुतपूर्व मयानघ
bhīṣma uvāca: śṛṇu rājann avahitaḥ sarvam etad yathātatham | yathāmati yathā caitac chrutapūrvaṃ mayānagha ||
भीष्मजी बोले—हे निष्पाप राजन्! सावधान होकर सुनो। मैंने जैसा पहले सुना था, उसी के अनुसार अपनी बुद्धि के मुताबिक यह समस्त वृत्तान्त यथार्थ रूप से कह रहा हूँ।
भीष्म उवाच