सांख्ययोगभेदः तथा योगबलोपदेशः
Sāṃkhya–Yoga Distinction and Instruction on Yogic Strength
देव्युवाच हिंसनीयस्त्वया नैव मम पुत्रत्वमागत: । न हि देवोदरात् कक्रिन्नि:ःसृतो नाशमृच्छति
देवी बोलीं—प्रभो! यह अब मेरा पुत्र हो गया है; अतः आपको इसका वध नहीं करना चाहिए। देव! जो आपके उदर से निकला हो, ऐसा कोई पुरुष विनाश को नहीं प्राप्त होता।
भीष्म उवाच