Parāśara’s Counsel on बुद्धि (Discernment), Karma-Consequences, and Avoidance of Pāpānubandha Actions
एतन्मे संशयं ब्रूहि पृच्छते भरतर्षभ । वृत्रस्तु राजशार्दूल यथा शक्रेण निर्जित:,भरतभूषण! नृपश्रेष्ठ! मैं यह बात आपसे पूछता हूँ, आप मेरे इस संशयका समाधान कीजिये। इन्द्रने वृत्रासुरको कैसे परास्त किया?
etan me saṁśayaṁ brūhi pṛcchate bharatarṣabha | vṛtras tu rājaśārdūla yathā śakreṇa nirjitaḥ ||
युधिष्ठिर बोले—हे भरतश्रेष्ठ! मैं पूछता हूँ, मेरे इस संशय का समाधान कीजिए। हे राजसिंह! शक्र (इन्द्र) ने वृत्र को किस प्रकार जीतकर परास्त किया?
युधिछिर उवाच