Śreyas-nirdeśa (Discerning the Superior Good): Nārada–Gālava Saṃvāda
देवानामेष वै गोष्ठो यदरण्यमिति श्रुति: । गाँव या नगरमें रहकर स्त्री-पुत्रोंमें आसक्ति रखना--यह मृत्युका घर ही है। “यदरण्यम्” इस श्रुतिके अनुसार जो वानप्रस्थ-आश्रम है, यह देवताओंकी गोशालाके समान है ।।
bhīṣma uvāca | devānām eṣa vai goṣṭho yad araṇyam iti śrutiḥ | nibandhanī rajjur eṣā yā grāme vasato ratiḥ ||
श्रुति कहती है—“अरण्य ही देवताओं की गोशाला (आश्रय-स्थान) है।” इसके विपरीत, जो ग्राम में रहकर गृह-बंधन में रमता है, उसकी वह रति बाँधने वाली रस्सी बन जाती है। इसलिए वानप्रस्थ का अरण्य-आश्रय देव-धाम के समान प्रशंसित है, और गृहासक्ति बंधन का कारण कही गई है।
भीष्म उवाच