तृष्णाक्षय-उपदेशः
Instruction on the Cessation of Craving
शास्त्र हाबुद्ध्वा तत्त्वेन केचिद् वादबलाज्जना: । कामद्वेषाभि भूतत्वादहड्कारवशं गता:,शास्त्रको यथार्थरूपसे न जानकर कुछ लोग वितण्डावादके ही बलसे रागदद्वेषसे अभिभूत होनेके कारण अहंकारके अधीन हो गये हैं
śāstram abuddhvā tattvena kecid vāda-balāj janāḥ | kāma-dveṣābhibhūtatvād ahaṅkāra-vaśaṃ gatāḥ ||
कपिल बोले—कुछ लोग शास्त्रों को तत्त्वतः न समझकर केवल वाद-बल के सहारे चलते हैं। काम और द्वेष से अभिभूत होकर वे अहंकार के वश में पड़ जाते हैं—और विद्या को सत्य-मार्ग नहीं, विवाद का साधन बना लेते हैं।
कपिल उवाच