तृष्णाक्षय-उपदेशः
Instruction on the Cessation of Craving
अशवनुवन्तश्नरितुं किंचिद् धर्मेषु सूत्रितम् । निरापद्धर्म आचारो हाप्रमादो5परा भव:
प्रवृत्तिमार्गी मनुष्य योगशास्त्र के सूत्रों में कहे गए यम-नियम आदि का किंचित् भी अनुष्ठान नहीं कर पाते। वह यौगिक आचार आपत्तिशून्य और प्रमादरहित है; वह काम आदि से पराभूत नहीं होता।
कपिल उवाच