तृष्णाक्षय-उपदेशः
Instruction on the Cessation of Craving
न वेदानां परिभवान्न शाठ्येन न मायया । महत प्राप्रोति पुरुषो ब्रह्मणि ब्रह्म विन्दति
वेदों का अनादर करके, शठता और माया-कपट से कोई मनुष्य महान् ब्रह्म को नहीं पाता, न ब्रह्म में ब्रह्म का साक्षात्कार करता है। वेद और वेदविहित कर्मों का आश्रय लेने से ही वह परम पद को प्राप्त होता है।
कपिल उवाच