तृष्णाक्षय-उपदेशः
Instruction on the Cessation of Craving
प्रागगर्भाधानान्मन्त्रा हि प्रवर्तन्ते द्विजातिषु । अविश्रम्भेषु वर्तन्ते विश्रम्भेष्वप्पसंशयम्
prāg garbhādhānān mantrā hi pravartante dvijātiṣu | aviśrambheṣu vartante viśrambheṣv apy asaṁśayam ||
कपिल बोले—द्विजों में गर्भाधान-संस्कार से पहले ही मन्त्रों की प्रवृत्ति आरम्भ हो जाती है। वे सार्वजनिक/औपचारिक कर्मों में भी चलते हैं और निजी/आत्मीय व्यवहार में भी—इसमें कोई संदेह नहीं।
कपिल उवाच