नारद–असित (देवल) संवादः — भूतप्रभवाप्यय, इन्द्रिय-गुण-विवेक, क्षेत्रज्ञ-तत्त्व
तां गामृषि: स्यूमरश्मि प्रविश्य यतिमत्रवीत् । हंहो वेदा३ यदि मता धर्मा: केनापरे मता:
उस समय स्यूमरश्मि नामक एक ऋषि उस गाय के भीतर प्रवेश करके कपिलमुनि से बोले—“अहो! यदि वेदों की प्रामाणिकता पर आपको संदेह है, तो अन्य धर्मों को किस आधार पर प्रमाण मानेंगे?”
भीष्म उवाच