नारद–असित (देवल) संवादः — भूतप्रभवाप्यय, इन्द्रिय-गुण-विवेक, क्षेत्रज्ञ-तत्त्व
अनालम्भे हादोष: स्यादालम्भे दोष उत्तम: | एवं स्थितस्य शास्त्रस्य दुर्विज्ञेये बलाबलम्
क्योंकि यज्ञादि कर्मों में आलम्भन न करने पर दोष नहीं होता, और आलम्भन करने पर महान् दोष होता है। ऐसी स्थिति में शास्त्र-वचनों का बलाबल जानना अत्यन्त कठिन है।
कपिल उवाच