पापात्म-धर्मात्म-लक्षणम् तथा निर्वेदेन मोक्षमार्गः | Marks of the Sinful and the Righteous; Dispassion (Nirveda) as a Path to Liberation
यश्न नोक्तो5थ निर्देश: स्त्रिया मैथुनतृप्तये । तस्य स्मारयतो व्यक्तमधर्मो नास्ति संशय:
यदि स्त्री मैथुनजन्य सुख के लिए कोई संकेत न भी करे, तो भी जो पुरुष उसके काम को उद्दीप्त कर उसे उकसाता है, उसे स्पष्ट ही अधर्म प्राप्त होता है—इसमें संशय नहीं।
भीष्म उवाच