पापात्म-धर्मात्म-लक्षणम् तथा निर्वेदेन मोक्षमार्गः | Marks of the Sinful and the Righteous; Dispassion (Nirveda) as a Path to Liberation
यो हायं मयि संघातो मर्त्यत्वे पाउ्चभौतिक: । अस्य मे जननी हेतु: पावकस्य यथारणि:
yo hāyaṁ mayi saṅghāto martyatve pāñcabhautikaḥ | asya me jananī hetuḥ pāvakasya yathāraṇiḥ ||
मर्त्य-जीवन में मुझे जो पंचभौतिक देह-समूह प्राप्त हुआ है, उसके उत्पन्न होने का प्रधान कारण मेरी माता है—जैसे अग्नि के प्रकट होने का मुख्य आधार अरणि-काष्ठ है।
भीष्म उवाच