कपिल–स्यूमरश्मि संवादः
Kapila and Syūmaraśmi on Renunciation, Householder Support, and Epistemic Authority
उपप्त्त्या हि सम्पन्नो यतिभिश्ैव सेव्यते । सततं धर्मशीलैश्व निपुणेनोपलक्षित:,यही युक्तिसंगत है, यति भी इसीका सेवन करते हैं तथा धर्मात्मा मनुष्य अच्छी तरह विचारकर सदा इसी धर्मका अनुष्ठान करते हैं
upapttyā hi sampanno yatibhiś caiva sevyate | satataṃ dharmaśīlaiś ca nipuṇenopalakṣitaḥ ||
यह धर्म युक्तिसंगत और भली-भाँति स्थापित है; यति भी इसी का सेवन करते हैं। धर्मशील मनुष्य विवेकपूर्वक इसे पहचानकर सदा इसी का आचरण करते हैं।
तुलाधार उवाच