कपिल–स्यूमरश्मि संवादः
Kapila and Syūmaraśmi on Renunciation, Householder Support, and Epistemic Authority
यदा चायं न बिभेति यदा चास्मान्न बिभ्यति | यदा नेच्छति न देष्टि ब्रह्म सम्पद्यते तदा
जब यह पुरुष न किसी से भय करता है, न कोई प्राणी इससे भय करता है; और जब यह न किसी की इच्छा करता है, न किसी से द्वेष—तब यह ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है।
तुलाधार उवाच