Daṇḍa, Ahiṃsā, and Proportional Kingship: The Dyumatsena–Satyavān Dialogue (दण्ड-अहिंसा-विवेकः)
चिराभिपन्न: कविश्ि: पूर्व धर्म उदाह्नत: । तेनाचारेण पूर्वेण संस्था भवति शाश्वती
आपने पहले उसी धर्म का वर्णन किया है, जिसे विद्वान् लोग चिरकाल से धारण करते चले आ रहे हैं। मैं भी यही समझता हूँ कि उस पूर्व-प्रचलित धर्म के आचरण से ही समाज की मर्यादा दीर्घकाल तक स्थिर रहती है।
युधिछिर उवाच