Daṇḍa, Ahiṃsā, and Proportional Kingship: The Dyumatsena–Satyavān Dialogue (दण्ड-अहिंसा-विवेकः)
गन्धर्वनगराकार: प्रथम सम्प्रदृश्यते । अन्वीक्ष्यमाण: कविश्नि: पुनर्गच्छत्यदर्शनम्
युधिष्ठिर बोले—धर्म का स्वरूप पहले गन्धर्वनगर के समान दिखाई देता है; पर विद्वानों द्वारा सूक्ष्म विचार-परख करने पर वह फिर अदृश्य-सा हो जाता है।
युधिछिर उवाच