Jājali’s Austerities and the Summons to Tulādhāra (जाजलि–तुलाधार-इतिहासः)
शरीर पुरमित्याहुः स्वामिनी बुद्धिरिष्यते । तत्त्वबुद्धे:ः शरीरस्थं मनो नामार्थचिन्तकम्
इस शरीर को पुर या नगर कहते हैं। बुद्धि इस नगर की रानी मानी गई है और शरीर के भीतर रहने वाला मन—निश्चयात्मिका बुद्धिरूप रानी के अर्थ-साधन का विचार करने वाला मन्त्री है।
व्यास उवाच