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Shloka 7

कामबन्धन-निवृत्ति तथा शान्तिलक्षण-उपदेशः | Release from Desire-Bondage and the Marks of Peace

न भुज्जीतान्तरा काले नानृतावाद्नयेत्‌ स्त्रियम्‌ नास्यानश्रन्‌ गृहे विप्रो वसेत्‌ कश्चिदपूजित:

मनुष्य को केवल प्रातः और सायं—इन दो समयों में ही भोजन करना चाहिए; बीच में न खाए। ऋतुकाल के अतिरिक्त अन्य समय में स्त्री को शय्या पर न बुलाए। और उसके घर आया हुआ कोई ब्राह्मण अतिथि बिना पूजन-सत्कार और भोजन पाए न ठहरे।

व्यास उवाच