ब्राह्मणस्य पूर्वतरा वृत्तिः — The Earlier Ideal Conduct of a Brahmana
River-of-Saṃsāra Metaphor
अहमासं यथाटद्य त्वं भविता त्वं यथा वयम् । मावमंस्था मया कर्म दुष्कृतं कृतमित्युत
आज जैसे तुम हो, कभी मैं भी वैसा ही था; और जैसे आज हम हैं, कभी तुम भी वैसे ही होओगे। इसलिए यह मानकर कि मैंने कोई कठिन कर्म कर दिखाया है, मेरा अपमान मत करो।
भीष्म उवाच