बलीन्द्रसंवादः — Kāla, Anityatā, and the Limits of Agency
Mahābhārata 12.217
कषायवर्जिति ज्ञानं येषामुत्पद्यते चलम् । यान्ति ते5पि परॉल्लोकान् विमुच्यन्ते यथाबलम्
जिन्हें रागादि कषायों से रहित, परन्तु चंचल (अस्थायी) ज्ञान उत्पन्न होता है, वे भी उत्तम लोकों को प्राप्त होते हैं; और फिर साधन-बल के अनुसार पूर्ण ज्ञान पाकर मुक्त हो जाते हैं।
भीष्म उवाच