दमप्रशंसा — Praise of Self-Restraint
Dama
क्रियाभि: स्नेहसम्बन्धात्स्नेहाच्छोकमनन्तरम् । सुखदु:खक्रियारम्भाज्जन्माजन्मकृतक्षणा:
ऐसी क्रियाओं से मनुष्य आसक्ति के बन्धन में पड़ता है; आसक्ति से अनन्तर शोक उत्पन्न होता है। फिर सुख-दुःखयुक्त कर्मों का आरम्भ होने से उसे बार-बार जन्म-मरण के क्लेश सहने पड़ते हैं।
भीष्म उवाच