जनकस्य मोक्षमार्गप्रश्नः तथा पञ्चशिखोपदेश-प्रस्तावः | Janaka’s Path to Liberation: Prelude to Pañcaśikha’s Instruction
संदेहमेतमुत्पन्नमच्छिनद् भगवानृषि: । तथा वार्ता समीक्षेत कृतलक्षणसम्मिताम्
भीष्मजी कहते हैं—इस प्रकार भगवान् महर्षि गुरुदेव ने शिष्य के मन में उत्पन्न हुए इस संदेह को काट दिया। अतः विद्वान् पुरुष को ऐसे उपायों पर दृष्टि रखनी चाहिए जो क्रिया द्वारा उद्देश्य-सिद्धि में सहायक हों।
भीष्म उवाच