Brahmacarya-Upāya: Jñāna, Śauca, and the Mind’s Role in Desire (शान्ति पर्व, अध्याय २०७)
तस्य विक्रमणाच्चापि देवानां श्रीर्व्यवर्धत । दानवाश्न पराभूता दैतेयी चासुरी प्रजा
उनके पराक्रम से—अर्थात् विराट् रूप धारण कर तीन पगों में त्रिलोकी को नाप लेने से—देवताओं की श्री बढ़ी। दानव पराजित हुए और दैत्य तथा असुरों की प्रजा भी पराभव को प्राप्त हुई।
भीष्म उवाच