Doṣa-Parīkṣā and Guṇa-Viveka
Examination of Faults and Discernment of the Guṇas
गुणवद्धिर्गुणोपेतं यदा ध्यानगुणं मन: । तदा सर्वान् गुणान् हित्वा निर्गुणं प्रतिपद्यते
भीष्म बोले—शब्दादि विषयगुणों से युक्त इन्द्रियों के संसर्ग से गुणों में घिरा हुआ मन जब ध्यानजन्य गुणों से सम्पन्न हो जाता है, तब वह उन समस्त गुणों को त्यागकर निर्गुण ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है।
भीष्म उवाच