Adhyāya 189: Japa—Inquiry into the Jāpaka, Method
Vidhi), and Fruit (Phala
भरद्वाज उवाच चातुर्वर्ण्यस्य वर्णेन यदि वर्णो विभिद्यते । सर्वेषां खलु वर्णानां दृश्यते वर्णसंकर:
भरद्वाज बोले— प्रभो! यदि चारों वर्णों में रंग के आधार पर भेद माना जाए, तो फिर सभी वर्णों में भिन्न-भिन्न रंग के मनुष्य होने से वर्णसंकर ही दिखाई देता है।
भरद्वाज उवाच