Bhṛgu–Bharadvāja-saṃvāda: Vānaprastha-parivrājaka-ācāra, Abhaya-dharma, and Lokānāṃ Vibhāga (Śānti-parva 185)
अपने-आप बछ। सा चतुरशीर्त्याधेकशततमो< ध्याय: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन भरद्वाज उवाच त एते धातव: पज्च ब्रह्मा यानसृजत् पुरा । आवूृता यैरिमे लोका महाभूताभिसंज्ञिता:
bharadvāja uvāca | te ete dhātavaḥ pañca brahmā yān asṛjat purā | āvṛtā yair ime lokā mahābhūtābhisaṃjñitāḥ ||
भरद्वाज ने कहा—ये पाँच धातु वही हैं जिन्हें ब्रह्मा ने सृष्टि के आदिमें रचा था। इन्हीं से ये समस्त लोक व्याप्त हैं; इसीलिए ये ‘महाभूत’ कहलाते हैं।
भरद्वाज उवाच