दान-धर्म-आश्रमविधानम्
Dana, Dharma, and the Four Āśramas
तथा सलिलसंरुद्धे नभसो<न््ते निरन्तरे । भित्त्वार्णवतलं वायु: समुत्पतति घोषवान्
इसी प्रकार जल से आकाश का सारा प्रान्त ऐसा अवरुद्ध हो गया था कि कहीं भी तनिक-सा अवकाश न था। तब उस एकार्णव के तल को भेदकर वायु घोर शब्द करती हुई प्रकट हुई।
भरद्वाज उवाच