अव्यक्त-मानस-सृष्टिवादः
Doctrine of Creation from the Unmanifest ‘Mānasa’
अनर्थों हि भवेदर्थों दैवात् पूर्वकृतेन वा । सम्बुद्धाहं निराकारा नाहमद्याजितेन्द्रिया
दैवयोग से अथवा पूर्वकृत कर्म के प्रभाव से कभी-कभी अनर्थ भी अर्थ बन जाता है। इसी से आज मैं जाग्रत होकर निराकांक्षा हो गई हूँ; अब मेरी इन्द्रियाँ अजित नहीं रहीं।
ब्राह्मण उवाच