अव्यक्त-मानस-सृष्टिवादः
Doctrine of Creation from the Unmanifest ‘Mānasa’
सेनजिदुवाच का बुद्धि: कि तपो विप्र क: समाधिस्तपोधन । किंज्ञानं कि श्रुतं चैव यत् प्राप्प न विषीदसि
सेनजित ने पूछा—तपोधन ब्राह्मणदेव! आपके पास ऐसी कौन-सी बुद्धि है, कौन-सा तप है, कौन-सी समाधि है, कौन-सा ज्ञान और कौन-सा श्रुत है, जिसे पाकर आप किसी प्रकार विषाद में नहीं पड़ते?
भीष्म उवाच