Adhyāya 174: Karma as an inescapable companion (कर्मानुगमन-उपदेश)
प्रत्येक मनुष्यको सदा कृतज्ञ होना चाहिये और मित्रकी इच्छा रखनी चाहिये; क्योंकि मित्रसे सब कुछ प्राप्त होता है। मित्रके सहयोगसे सदा सम्मानकी प्राप्ति होती है ।।
प्रत्येक मनुष्य को सदा कृतज्ञ होना चाहिए और मित्रता की इच्छा रखनी चाहिए; क्योंकि मित्र से सब कुछ प्राप्त होता है। मित्र से भोग भी मिलते हैं और मित्र के द्वारा आपत्तियों से मुक्ति होती है; इसलिए बुद्धिमान पुरुष उत्तम सत्कारों द्वारा मित्र का पूजन करे।
भीष्म उवाच