Ajagara-vrata (The ‘Python’ Discipline): Prahrāda Questions a Wandering Sage
तस्य नित्यं सदा5<षाढ्यां माघ्यां च बहवो द्विजा: । ईप्सितं भोजनवरं लभन्ते सत्कृतं सदा,उसके यहाँ आषाढ़ और माघकी पूर्णिमाको सदा बहुत-से ब्राह्मण सत्कारपूर्वक अपनी इच्छाके अनुसार उत्तम भोजन पाते थे
tasya nityaṁ sadā āṣāḍhyāṁ māghyāṁ ca bahavo dvijāḥ | īpsitaṁ bhojana-varaṁ labhante satkṛtaṁ sadā ||
उसके यहाँ आषाढ़ और माघ की पूर्णिमा को सदा बहुत-से ब्राह्मण सत्कारपूर्वक अपनी इच्छानुसार उत्तम भोजन पाते थे।
भीष्म उवाच