असंतोषादिदोष-निरूपणम्
On the Faults of Discontent and the Discipline of Detachment
यथेद्धः प्रज्वलत्यग्निरसमिद्ध: प्रशाम्यति । अल्पाहारतया त्वग्निं शमयौदर्यमुत्थितम्
जैसे अग्नि में जितना ईंधन डाला जाए, वह उतनी ही प्रज्वलित होती जाती है; और ईंधन न डाला जाए तो अपने-आप शांत हो जाती है। इसी प्रकार आहार घटाकर इस उदर से उठी जठराग्नि को शांत करो।
युधिछिर उवाच