Dama-pradhāna-dharma (Self-restraint as the Root of Dharma) — Śānti-parva 154
मोक्षधर्मश्रितैर्वाक्यहेतुमद्धिः सुनिष्ठरै: । मयोक्ता गच्छत क्षिप्रं स्वं स््वमेव निवेशनम्
mokṣadharmaśritair vākyair hetumadbhiḥ suniṣṭhuraiḥ | mayoktā gacchata kṣipraṃ svaṃ svam eva niveśanam ||
जम्बुक बोला—मेरी ये बातें तुम्हें बड़ी कठोर लग सकती हैं; पर वे हेतुयुक्त हैं और मोक्ष-धर्म से संबद्ध हैं। इसलिए इन्हें स्वीकार करो और मेरे कहने से तुम सब शीघ्र-शीघ्र अपने-अपने घर लौट जाओ।
जम्बुक उवाच