Śaraṇāgata-Atithi-Dharma in the Kapota Narrative (कपोत-आख्यानम्—शरणागतधर्मः)
विभिन्नकलशाकीर्ण श्वरचर्मच्छेदनायुतम् । वराहखरभग्नास्थिकपालघटसंकुलम्
वहाँ चारों ओर टूटे-फूटे घरों के खपरे-ठीकरे बिखरे पड़े थे; कुत्तों के चमड़े छेदने-चीरने के औज़ार रखे थे; और सूअरों तथा गदहों की टूटी हड्डियाँ, खोपड़ियाँ और घड़े हर ओर भरे दिखाई देते थे।
भीष्म उवाच