Śaraṇāgatapālana—Prastāvanā
Protection of the Refuge-Seeker: Opening of the Kapota Narrative
“किसी यथार्थ कारणसे शत्रुके मनमें विश्वास उत्पन्न करके जब कभी उसका पैर लड़खड़ाता देखे अर्थात् उसे कमजोर समझे तभी उसपर प्रहार कर दे ।।
किसी यथार्थ कारण से शत्रु के मन में विश्वास उत्पन्न करके, जब कभी उसका पाँव लड़खड़ाता देखे—अर्थात् उसे दुर्बल समझे—तभी उस पर प्रहार कर दे। जो शंका के योग्य नहीं, उस पर भी शंका करे; और जिस पर शंका हो, उससे तो नित्य शंका रखे। क्योंकि निश्चिन्तता से उत्पन्न भय जड़-मूल सहित भी नष्ट कर डालता है।
भीष्म उवाच