Dasyu-maryādā and Buddhi-guided Rāja-nīti (दस्युमर्यादा तथा बुद्धिप्रधान-राजनीति)
गृहस्नेहावबद्धानां नराणामल्पमेधसाम् । कुस्त्री खादति मांसानि माघमां सेगवा इव
गृहासक्ति में बँधे हुए अल्पबुद्धि पुरुषों के मांस को कुटिल स्त्री खा जाती है—अर्थात् उन्हें भीतर ही भीतर सुखा डालती है—जैसे केकड़े की मादा को उसकी ही संतानें नष्ट कर देती हैं।
ब्रह्मदत्त उवाच