Dasyu-maryādā and Buddhi-guided Rāja-nīti (दस्युमर्यादा तथा बुद्धिप्रधान-राजनीति)
तरसा ये न शक्यन्ते शस्त्रै: सुनिशितैरपि । साम्ना ते5पि निगृहान्ते गजा इव करेणुभि:
tarasā ye na śakyante śastraiḥ suniśitair api | sāmnā te 'pi nigṛhyante gajā iva kareṇubhiḥ ||
जो लोग बलपूर्वक—तीखे शस्त्रों से भी—वश में नहीं किए जा सकते, वे भी साम और मधुर वाणी से नियंत्रित हो जाते हैं; जैसे हथिनियों की सहायता से गज पकड़े जाते हैं।
ब्रह्मदत्त उवाच