दीर्घदर्शी–दीर्घसूत्र–संप्रतिपत्तिमान् आख्यानम्
The Parable of Foresight, Procrastination, and Presence of Mind
यदेवमाहु: पापेन चारित्रेण विवर्जित: । सुभृशं तप्यते तेन वाक्शल्येन परिक्षत:
दुर्बल मनुष्य के विषय में लोग कहते हैं—‘अरे! यह तो पापमय आचरण के कारण सदाचार से रहित होकर अपने बन्धु-बान्धवों द्वारा त्याग दिया गया है।’ उनके वचन-बाण से घायल होकर वह अत्यन्त संतप्त हो उठता है।
भीष्म उवाच