Kośa-saṃjanana and Subtle Dharma
Treasury Formation and Fine-Grained Ethics
अबलस्य कुतः कोशो हाकोशस्य कुतो बलम् । अबलस्य कुतो राज्यमराज्ञ: श्रीर्भवेत् कुत:
यदि राजा बलहीन हो तो उसके पास कोश कैसे रह सकता है? और जिसके पास कोश नहीं, उसके पास बल (सेना) कहाँ से होगा? जिसके पास बल नहीं, उसका राज्य कैसे टिकेगा? और जो राजा ही नहीं रहा, उसके पास लक्ष्मी कैसे ठहरेगी?
भीष्म उवाच