Kośa, Bala, and Maryādā: Treasury, Capacity, and Enforceable Limits (कोश-बल-मर्यादा)
कर्मणा बुद्धिपूर्वेण भवत्याढ्यो न वा पुनः । तादृशो<यमनुप्रश्न: संव्यवस्य: स्वया धिया
बुद्धिपूर्वक किए हुए कर्म (प्रयत्न) से मनुष्य धनाढ्य हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता। ऐसे प्रश्न पर तुम्हें अपनी ही बुद्धि से विचार करके किसी निश्चय पर पहुँचना चाहिए।
भीष्म उवाच