Kośa, Bala, and Maryādā: Treasury, Capacity, and Enforceable Limits (कोश-बल-मर्यादा)
अकार्यमपि यज्ञार्थ क्रियते यज्ञकर्मसु । एतस्मात् कारणादू राजा न दोषं प्राप्तमर्ति
यज्ञकर्मों में यज्ञ के लिए कभी-कभी वह कार्य भी किया जाता है जो सामान्यतः करने योग्य नहीं माना जाता, फिर भी वह दोष नहीं कहलाता। इसी कारण आपत्तिकाल में प्रजा को पीड़ा देकर भी राजा दोष का भागी नहीं होता।
भीष्म उवाच