आपद्-राजनीतिः (Āpad-rājanīti) — Policy Options in Multi-Front Crisis
ऋषिरुवाच कृशत्वेन सम॑ राजन्नाशाया विद्यते नूप । तस्या वै दुर्लभत्वाच्च प्रार्थिता: पार्थिवा मया
ऋषि बोले—नरेश्वर! आशा (और आशावान) की दुर्बलता के समान दूसरी कोई दुर्बलता नहीं है। और जिस वस्तु की आशा की जाती है, उसकी दुर्लभता के कारण ही मैंने अनेक राजाओं के यहाँ याचना की है।
ऋषभ उवाच