Gautama–Yama Saṃvāda: Mātṛ-Pitṛ-Ṛṇa (Debt to Parents) and Śubha-Loka Attainment
त॑ कार्मुकधरं दृष्टवा श्रमार्त क्षुधितं तदा । समेत्य ऋषयस्तस्मिन् पूजां चक्कुर्यथाविधि
उस समय श्रम से पीड़ित और भूख से व्याकुल, धनुष धारण किए हुए उसे देखकर अनेक ऋषि उसके पास आए और सबने मिलकर विधिपूर्वक उसका पूजन-सत्कार किया।
भीष्म उवाच